Thursday, 29 November 2012

किसी की मौत का सबब 
दुसरे की सफ़र का सौगात होती है।।


Wednesday, 21 November 2012

क्यूँ जिसे चाहते हैं कि साथ हो,
वो बेखबर रहता है हमारे हर एहसास से।।।
हर लफ्ज़ बहुत कुछ कहता है,
इंसा बेगाने हो जाये तो कोई बात नहीं 
पर लफ्ज़, लफ्ज़ बेगाने हो जाये तो 
दिल तार तार हो जाता है।।।।।

Tuesday, 20 November 2012


लम्हा लम्हा ये जिंदगी बीत जाएगी
कतरा कतरा कर बूंदें ख़तम हो जाएँगी।।।
ना जाने जीवन के किस मोड़ पे,
लोग बिछुड़ जाएँ।
जनम ले और फिर जीवन चक्र
ही ख़तम हो जायें।।।।

Thursday, 15 November 2012


बेवफाई तूने की दर्द हमें हुआ,ठोकर तुमने दी तनहा हम हुए।।।।।

Saturday, 9 June 2012

तन्हा ही चले थे राहों में
जाने कब एक परिंदा सा
जुड़ गया राह में और
फिर तन्हा  कर गया
वो हमें .....

Sunday, 8 April 2012

काश!! ये सबब यूँ ना
होता, तुम तुम होते
हम हम रहते
ये कारवां यूँ ही 
चलता रहता ।।
हम हम ना रहे
वो वो ना रहे
क्या पता था की
जिंदगी यूँ ही
मजाक बनकर
रह जाएगी।।।

ऐ जिंदगी!!
तेरी रुस्वायिओं ने
बेइंतहा दर्द दिया है
अब ना कर सितम और
की दम तोड़ दे जान ही ।।।
जिसे माना था अपना
दगा दे गया वो
ना जाने किस मोड़ पर
अकेला छोड़ गया वो ।।।
बहुत कम हैं जिंदगी में लोग
जो जीवन भर  दे साथ
ठुकराना न उन्हें जो
दें जिंदगी भर साथ तुम्हारा।।।।

Friday, 6 April 2012


जो चलते जाते हैं जीवन की राहों में
उन्हें कोई डर नहीं बुलंदी के पथ पर
वो हमसे भागते ही रहे
हम उनसे बेपनाह प्यार
करते ही गए
क्या पता था की हमारी
मौत उनको हमारे
करीब ले आयेगी..
हमें तुमसे गिला नहीं
तुम हमारे नहीं..
जो हमारा था
 वो ही हमारा
 दामन छोड़ गया
तो तुमसे क्यूँ
गिला करें ????
तेरे आगोश में आकर इक
सुकून मिलता है..
तेरी बातों में एहसास
होता है अपनेपन का..
तेरे साथ हूँ तो हर
जज्बात अपने से लगते हैं....
तू है तो सारा जहाँ रंगीन
लगता है...
तेरे बिन सूनापन है
इस दिल के जहाँ में....

तेरे आगोश में आकर इक
सुकून मिलता है..
खुद में लिप्त हो गयी हूँ  मैं
इस भंवर में कहीं खो गयी हूँ मैं
कहीं गुम ना हो जाऊ  इस जहाँ में

अब और रुसवायिया ना दे जिंदगी
की खुद ही टूट जाऊ  इस सफ़र में
बहुत ली है इम्तेहान 
की अब हर हद पार हो चुकी है
खुद में सिमटना चाहती हूँ 
पर शायद इस कदर टूट कर
सिमटना भी नहीं है आसान ।।

Wednesday, 21 March 2012

बहुत उदास है मन

बहुत उदास है मन
उचाट हो चला है
इस दुनिया से
अजीब दास्ताँ है
इस जहाँ की,
कोई नहीं समझता
की चाह हमारी भी
है कुछ।।।।।।।।
बहुत उदास है मन 
नहीं चाहिए कोई
जो न समझ सके
कुछ भी की इन्सान
हम भी हैं आखिर।।।।।




Wednesday, 14 March 2012

क्यूँ इतना दूर है वो
चाहकर भी न आ सके पास
क्यूँ चाहकर भी न चाहना
चाहता है वो.।।
क्या है उसमें जो खिंचा
चला जाता है मन
नहीं जाना चाहते हुए भी 
लुट जाने का जी चाहता है 

क्यूँ इतना दूर है वो
चाहकर भी न आ सके पास
क्यूँ चाहकर भी न चाहना
चाहता है वो।।

परछाई

कहते हैं की सबकी परछाई है
पर बिना अँधेरे में उजाले की
किरण के किसी की भी
परछाई का कोई अर्थ नहीं है।।।।
सब हैं  फिर भी अकेली खोयी हूँ
सबका साथ होकर भी इक अंजना
खालीपन है, जानते हैं पर
फिर भी जीवन है मेरा
और संघर्ष भी मेरा ही है।।
सब हैं  फिर भी अकेली खोयी हूँ 
काश कोई समझ पाता इस
एहसास को जो जाना पहचाना है
पर  फिर भी इसे समझने से
 इनकार है सबको
सब हैं  फिर भी अकेली खोयी हूँ।।




बहुत अकेले हैं
चलाना  रुकना
किसके लिए
सब हैं यहाँ
अनजान,
कोई ना अपना
खुद खुदा भी कहता
है येही की
अकेले आयें हैं
और अकेले ही जाना है
तो इस जीवन को बाँटने
का क्या मतलब??

हम आंधियों में भी आपको ढूढ़ते चले
पर ये आलम किसे कहें की अब हवाएं भी
धोखा देने लगी हैं..........

Tuesday, 13 March 2012

नमन्ति फलिनो वृक्षा: नमन्ति गुनिनो जनाः
नौ  नमन्ति शुष्को वृक्षा: नौ नमन्ति मूर्खो जनाः








डाल वो  झुकता है जिसमें फल होता है
और मनुष्य वो ही झुकता है जो विद्यावान/ज्ञानी  होता है
जिस प्रकार सुखा डाल टूट जाता है पर झुकता नहीं ,

उसी तरह मुर्ख व्यक्ति विनम्र नहीं हो सकता है...



Sunday, 4 March 2012


नए जीवन की शुरुआत में सब होते हैं "मासूम"
पर जैसे बढ़ता जाता है सब बदल जाते हैं
खो जाती है "मासूमियत" इंसानों की भीड़ में...



रंग





प्यार के कई रंग हैं
एक है लाल जो प्रतीक है 
पर जब प्यार ना हो पूरा तब 
बनता है रंग हलाहल का




जीवन





तनहाइयों में सफ़र कटता रहा
उनके बिना जीवन सुना लगता रहा
वो हो ना हो पर जीवन चलता रहा.......                                                                                                                                                                  
वो चले इस कदर की मुड़कर भी न देखा
हम टूटकर ही रह गए कुछ बच ना सका

कुछ यूँ उन्होंने दगा दिया की
हम सोच भी न सकें और
वो हमें बेबस छोड़कर चल दिए ...............
शतरंज की सह और मात
जिंदगी की हार और जीत
प्यार की तन्हाई और दीवानगी
साथी के शिकवे और गिले
इनके बाद भी हर सफ़र
खत्म नहीं होता, बस
चलता जाता है

हम आपकी वफ़ा पा ना सकें
आप हमारी कीमत समझ ना सकें
क्या शिकवा करें आपसे
आप हमारे हो न सकें .................
हम आग की तपिश में जलते रहे
उनके इन्तेजार में तड़पते रहे
वो क्या जाने की तड़प क्या होती है
कोई हमसे पूछे प्यार की
इन्तहा क्या होती है

Friday, 2 March 2012



उसे नहीं था हमारा इन्तेजार
हम तड़पते रहे उसके चाहत में.......

था अक्स उसका आज भी
 जिंदा हमारे ज़हन में 
था अक्स उसका आज भी
 जिंदा हमारे ज़हन में 
काश की वो समझ पातें 
की हम चीज़ नहीं 
हम भी है आखिर एक इन्सां
क्यूँ हर अनजाना अपना सा लगता है.
क्यूँ उस अनजाने को दिल देने का मन करता है
उसकी मोहब्बत म लूट जाने का जी चाहता है.........

Thursday, 1 March 2012



रमणी नैनो वाली कजली आँखों वाली
नैनन से जादू कर दिल का होश उड़ा ले गयी ...
थे हम भी खफा उनसे
वोह बिना बताये चले गए दूर हमसे
पर रहा ना गया हमसे जब
पलट कर एक नजर ठहराइ हमपे

उनकी आँखों में अजीब सी कशिश है.
सारी दुनिया इन्ही में नजर आती है.
राहें चलें ना चलें जिंदगी  
बस चलती जाती हैं...

राहें अकेले नहीं कटती
आपके बिना राहें भी
अधूरी लगती हैं.
हम तो आपकी आँखों में उतर जाना चाहते हैं.
 बस आप ही हैं जो हमसे यूँ खफा खफा से रहते हैं.....

करार-ए- इकरार


इत्तेफाक है की लोग हमजरीनो को भी चाहें
हम तो मेहखानो में डूब गए और वह हैं की 
अब तक चाहत का करार-ए- इकरार भी ना कर पाएं.

खफा .......

थे हम भी खफा उनसे
वोह बिना बताये चले गए दूर हमसे
पर रहा ना गया हमसे जब
पलट कर एक नजर ठहराइ हमपे

जीवन की डोर


हम हम ना रहे तुम तुम ना रहे
कैसे कह दें तुम्हें की 
जीवन की डोर में अब तुम ना रहे....


जन्नत-ऐ-गजल लगती हो
क्या खूब लगती हो
हूस्न-ऐ- क़यामत ढाती हो

अदा .......


हम तो आपकी अदा पर कायल हुए 
क्या पता था की आप भी हमें बेपनाह चाहते हो

नैन.....


रमणी नैनो वाली कजली आँखों वाली
नैनन से जादू कर दिल का होश उड़ा ले गयी ...

जुदाई.......


हम तन्हाई से नहीं डरते 
डरना तो इस बात का है की 
तन्हाई तो सह लेंगे पर जुदाई ..
जुदाई के गम म ना मरना आसान ना जीना......

हुस्न ऐ नजाकत


हुस्न इ नजाकत में अंतर तो देखो
हुस्न ऐ नजाकत में अन्तर  तो देखो
लोग हुस्न में दीवाने होते हैं
किसी की नजाकत को ख़ाक देखेंगे.

सजदा...

सजदे में सर यूँही नहीं नहीं झुकते 
सजदे में सर यूँही नहीं झुकते 
सजदा भी उन्ही के लिए होता है 
जिनके इश्क में फन्ना होना होता है....

मोहब्बत..............

इबादत है मोहब्बत लोग कहते है 
 पर यह नहीं जानते लोग
 इनायत भी इबादत होती है ...

जीवन के भूले बिसरे तराने

जीवन के भूले बिसरे तराने 
लोग यूँही गुनगुनाते हैं
जीवन के भूले बिसरे तराने 
लोग यूँही गुनगुनाते हैं
मौत आये  या जिंदगी लूटे 
लोग यूँही रहते हैं
जीवन के भूले बिसरे तराने 
लोग यूँही गुनगुनाते हैं
सांसें चलती हैं
आंखें नम होती हैं पर डोर नहीं छूटती है.
जीवन के भूले बिसरे तराने 
लोग यूँही गुनगुनाते हैं