अब और रुसवायिया ना दे जिंदगी
की खुद ही टूट जाऊ इस सफ़र में
बहुत ली है इम्तेहान
की अब हर हद पार हो चुकी है
खुद में सिमटना चाहती हूँ
पर शायद इस कदर टूट कर
सिमटना भी नहीं है आसान ।।
की खुद ही टूट जाऊ इस सफ़र में
बहुत ली है इम्तेहान
की अब हर हद पार हो चुकी है
खुद में सिमटना चाहती हूँ
पर शायद इस कदर टूट कर
सिमटना भी नहीं है आसान ।।
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