बहुत उदास है मन
उचाट हो चला है
इस दुनिया से
अजीब दास्ताँ है
इस जहाँ की,
कोई नहीं समझता
की चाह हमारी भी
है कुछ।।।।।।।।
बहुत उदास है मन
नहीं चाहिए कोई
जो न समझ सके
कुछ भी की इन्सान
हम भी हैं आखिर।।।।।
उचाट हो चला है
इस दुनिया से
अजीब दास्ताँ है
इस जहाँ की,
कोई नहीं समझता
की चाह हमारी भी
है कुछ।।।।।।।।
बहुत उदास है मन
नहीं चाहिए कोई
जो न समझ सके
कुछ भी की इन्सान
हम भी हैं आखिर।।।।।
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