Sunday, 8 April 2012

काश!! ये सबब यूँ ना
होता, तुम तुम होते
हम हम रहते
ये कारवां यूँ ही 
चलता रहता ।।
हम हम ना रहे
वो वो ना रहे
क्या पता था की
जिंदगी यूँ ही
मजाक बनकर
रह जाएगी।।।

ऐ जिंदगी!!
तेरी रुस्वायिओं ने
बेइंतहा दर्द दिया है
अब ना कर सितम और
की दम तोड़ दे जान ही ।।।
जिसे माना था अपना
दगा दे गया वो
ना जाने किस मोड़ पर
अकेला छोड़ गया वो ।।।
बहुत कम हैं जिंदगी में लोग
जो जीवन भर  दे साथ
ठुकराना न उन्हें जो
दें जिंदगी भर साथ तुम्हारा।।।।

Friday, 6 April 2012


जो चलते जाते हैं जीवन की राहों में
उन्हें कोई डर नहीं बुलंदी के पथ पर
वो हमसे भागते ही रहे
हम उनसे बेपनाह प्यार
करते ही गए
क्या पता था की हमारी
मौत उनको हमारे
करीब ले आयेगी..
हमें तुमसे गिला नहीं
तुम हमारे नहीं..
जो हमारा था
 वो ही हमारा
 दामन छोड़ गया
तो तुमसे क्यूँ
गिला करें ????
तेरे आगोश में आकर इक
सुकून मिलता है..
तेरी बातों में एहसास
होता है अपनेपन का..
तेरे साथ हूँ तो हर
जज्बात अपने से लगते हैं....
तू है तो सारा जहाँ रंगीन
लगता है...
तेरे बिन सूनापन है
इस दिल के जहाँ में....

तेरे आगोश में आकर इक
सुकून मिलता है..
खुद में लिप्त हो गयी हूँ  मैं
इस भंवर में कहीं खो गयी हूँ मैं
कहीं गुम ना हो जाऊ  इस जहाँ में

अब और रुसवायिया ना दे जिंदगी
की खुद ही टूट जाऊ  इस सफ़र में
बहुत ली है इम्तेहान 
की अब हर हद पार हो चुकी है
खुद में सिमटना चाहती हूँ 
पर शायद इस कदर टूट कर
सिमटना भी नहीं है आसान ।।